ऐसे लोग जिन्हें आप नहीं जानते या फिर वे वास्तव में मौजूद नहीं होते, उनके साथ एकतरफा भावनात्मक रिश्ता होना पैरासोशल संबंध कहलाता है। किसी गायक, खिलाड़ी, अभिनेता, किसी किताब या शो के काल्पनिक पात्र से जुड़कर उनके फैन होना यही है। कई बार समर्पण इतना होता है कि व्यक्ति उनकी हर छोटी बात पर नजर रखता है, उनसे प्रभावित रहता है, उनकी जीत-हार को खुद के साथ जोड़ लेता है।
हार्वर्ड कैनेडी स्कूल में प्रोफेसर, समाजशास्त्री और लेखक अर्थर सी. ब्रूक्स के अनुसार, ‘ये रिश्ते दूसरों से जुड़ने की हमारी सहज प्रवृत्ति से ही बनते हैं। आज अपने पसंदीदा सेलिब्रिटीज और काल्पनिक किरदारों से जुड़ी सूचनाओं तक पहुंच बनाने के कई साधन मौजूद हैं। हैरी पॉटर बुक सीरीज और बे्रकिंग बैड जैसे टीवी शो की लोकप्रियता का बड़ा कारण यह भी है। आप इन चरित्रों से भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं, फिर भले वह पात्र मनोरोगी भी हो। पर, बु्रक्स कहते हैं कि हर रिश्ते की तरह इन संबंधों के फायदे और नुकसान दोनों हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता को बच्चों के पैरासोशल संबंधों पर नजर रखनी चाहिए। अगर आप खुशी के लिए किसी एक किरदार पर बहुत अधिक निर्भर हैं तो देखें कि असल कमी कहां है? बेहतर यह है कि आप असल जीवन में मधुर संबंध बनाएं। किसी मित्र के साथ भोजन करें। परिवार संग समय बिताएं। लोगों को स्पर्श करें, गले लगाएं। जब असली रिश्ते अच्छे बनेंगे तो काल्पनिक किरदारों की कम परवाह करेंगे।
(हार्वर्ड हेल्थ ब्लॉग से साभार)
लाभ
ये रिश्ते जीवन के लिए अच्छे पूरक हो सकते हैं। आपको प्रेरित, शिक्षित और सुकून दे सकते हैं। एक समूह या विचार से जुड़े होने के कारण व्यक्ति अकेलापन कम महसूस करता है। किसी किरदार से बहुत जुड़ाव मूल्यों पर भी असर डाल सकता है। हम उनसे सही-गलत के सबक, अनुशासन व आदि सीखने के लिए प्रेरित होते हैं।
नुकसान
बू्रक्स कहते हैं, ‘ऐसे रिश्तों में प्यार के बदले में प्यार नहीं मिलता। ये नकली भोजन की तरह है, जो देखने में सुंदर हैं पर पोषण नहीं मिलता। ऐसे में अगर आप बहुत निर्भर हैं, तो अकेलापन और अलगाव बढ़ सकता है। हम पात्र से गलत सबक सीख सकते हैं।
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