सोमवार, 20 जनवरी 2025

आहत लोगों का एक-दूसरे के प्रति आकर्षण

 अपने अकेलेपन को दें सही दिशा 

यं को बेहतर बनाते हुए आगे बढ़ना एक अलग सा अनुभव होता है। कभी-कभी यह एक खूबसूरत अहसास लगता है तो कभी बहुत अजीब सा महसूस होने लगता है। असल में जब आप सालों तक भावनात्मक आघात झेलने और बचपन के कड़वे अनुभवों को संज्ञान में लेकर उनसे बाहर निकलने की दिशा में काम करने लगते हैं तो आपका एक नया व्यक्तित्व उभर कर सामने आने लगता है। अचानक ही आप स्वयं को एक ऐसी दुनिया में पाते हैं, जहां आप अकेले हैं। किसी स्थिति में फंसे रहने और उससे बाहर निकलने के बीच का यह फासला एक ऐसी खाई की तरह महसूस होता है, जिसे पाटा नहीं जा सकता है।

बस पड़ाव है अकेलापन 

स्वयं के विकास और आगे बढ़ने की यात्रा हममें बहुत कुछ बदलाव लाती है। हम दुनिया को और खुद को अलग ढंग से देखने लगते हैं। हीलिंग की प्रक्रिया में कई बार हमें अपने एकाकीपन को भी गले लगाना पड़ता है। आपकी प्राथमिकताएं और रिश्तों को लेकर समझ तो बदलती ही है साथ ही ऊपरी दिखावे वाले रिश्ते भी खोखले लगने लगते हैं। 

अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन द्वारा 2023 में किए गए एक शोध के अनुसार, 48 प्रतिशत अमेरिकी अकेलेपन का शिकार हैं और 60 प्रतिशत लोगों को लगता है कि कोई उन्हें समझता ही नहीं है। अकेलापन असहज करता है, क्योंकि हम अपनी कमजोरियों का सामना करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, बहुत से लोग ऐसे परिवेश में पले-बढ़े होते हैं, जहां भावुक होने को कमजोरी की निशानी माना जाता है। इसलिए उन्हें अपनी पीड़ा व्यक्त करने की बजाय उसे छिपाने की शिक्षा दी जाती है। लेकिन, जब आप ऐसे माहौल से खुद को बाहर निकालने के प्रयास करने लगते हैं तो आप आपसी समझ, सम्मान, ईमानदारी और पारदर्शी रिश्तों के प्रति आकर्षित होने लगते हैं। हालांकि ऐसे लोगों की संख्या कम ही होती है। 

पुरानी रूढ़ियों से आगे निकलना

स्वयं का विकास उन संबंधों से आगे निकलना भी है, जो कभी आपको सुकून पहुंचाते थे। कहते हैं कि हम अपनी सोच जैसे लोगों के प्रति ही आकर्षित होते हैं। अर्थात, जब दो लोग मिलते हैं तो उनके छिपे हुए दर्द भी अकसर आपस में जुड़ जाते हैं। विख्यात मनोविशेषज्ञ हार्वेल हेंड्रिक्स ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा है कि हम ऐसे साथी का चुनाव करते हैं, जो हमारे अतीत के घावों को परिलक्षित करता है। लेकिन जब आप बेहतर महसूस करने लगते हैं तो स्वत: ही ऐसे लोगों से दूरी बना लेते हैं। यदि आप अपने अतीत के कटु अनुभवों या यादों के साथ सेहतमंद तरीके से निबटना सीख जाते हैं तो वो लोग अपने आप ही दूर होने लगते हैं, जो ऐसा करना नहीं जानते हैं। आपकी भावनात्मक स्पष्टता उन्हें अपनी पहुंच से बाहर लगने लगती है, जबकि वे उसी पुराने चक्र में उलझे रहते हैं।

ऐसे बनेंगे सेहतमंद रिश्ते

ऐसे समाज में जहां हर व्यक्ति संघर्ष कर रहा हो, अच्छे और बेहतर रिश्ते बनाना अपने आप में बहुत थका देने वाला अनुभव हो सकता है। लेकिन, यह असंभव कार्य नहीं है। कुछ बातों का ध्यान रखकर ऐसा किया जा सकता है।

समान सोच के लोगों से जुड़ें 

ऐसे समुदायों का हिस्सा बनें, जहां विकास, चेतना और सकारात्मक तरीकों से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हो। आप चाहें तो किसी ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप या ध्यान शिविर में भी हिस्सा ले सकते हैं। इन स्थानों पर आपको अपनी मानसिक सेहत बेहतर बनाने में बहुत मदद मिल सकती है।

सीमाओं का निर्धारण

जो लोग आपकी भावनात्मक ऊर्जा बेकार में खर्च करवाते हों, उनसे दूरी बना लेने में कोई बुराई नहीं है। सीमाओं का अर्थ दीवार नहीं है, बल्कि अपनी मानसिक शांति की रक्षा करना भी है। सीमाएं निर्धारित कर लेने पर आपको भावनात्मक रूप से परिपक्व लोगों के साथ समय बिताने का अधिक समय मिलेगा। आप खुद को  बेहतर और ऊर्जावान महसूस करेंगे। 

सच्चे रिश्तों को महत्व दें 

जो लोग आपसे प्रेम करते हैं और आपको आगे बढ़ते देखकर खुश होते हैं, उन्हें सहेज कर रखें। हो सकता है ऐसा करने से आपके पास बहुत कम रिश्ते बचें। पर, ये वो कीमती रिश्तें हैं, जो आपको नई राह दिखाएंगे। 

जारी रखें अपनी यात्रा

हो सकता है कि और ज्यादा बेहतर की चाह आपको अपने भीतर बदलाव करने के लिए उकसाती हो। पर, उस कारण को याद रखिए, जिसकी वजह से आप यहां तक बढ़ कर आए हैं। अपनी यात्रा में साथ देने वाले लोगों पर भी भरोसा रखिए कि वे  आपको सही मार्ग चुनने में मदद करेंगे। खुद पर यकीन और अपनों का साथ यात्रा के आनंद को बढ़ा देता है।  


आहत लोगों का एक-दूसरे के प्रति आकर्षण

यह मानव स्वभाव है और शोध भी मानते हैं कि भावनात्मक रूप से आहत लोग एक-दूसरे के प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं। पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी द्वारा किए गए एक शोध में भी पाया गया कि एक जैसी भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहे लोग आपस में ज्यादा जुड़ते हैं। लेकिन, जब आप इस चक्र को तोड़ने की दिशा में काम करते हैं तो आपके रिश्तों का रूप बदल जाता है। जो शुरुआत में कुछ खोने या अकेले पड़ जाने का अहसास देता है। कई बार ऐसे लोग आप पर उनसे जुड़े रहने के लिए दबाव डालते हैं, आपको खुदगर्ज मान लेते हैं। ऐसे क्षणों में खुद पर भरोसा रखना आपकी अपनी मानसिक सेहत को अच्छा रखने में मदद कर सकता है। 


आगे बढ़ने से मिलेगी शांति

आगे बढ़ने के साथ-साथ आपको समझ आने लगता है कि आप अकेले नहीं हैं। दुनिया में अनेक  ऐसे लोग हैं, जो आगे बढ़ते हुए आपकी तरह ही अकेला महसूस करते हैं। लेकिन स्वयं की बेहतरी लोगों की भीड़ में नहीं, बल्कि अंतर्मन को जाग्रत करने में ही निहित है। इसलिए हतोत्साहित करने वाले लोगों की तरफ ध्यान न देकर सिर्फ मंजिल की ओर कदम बढ़ाएं। अपने से जुड़ते हुए आगे बढ़ना ही असल शांति की ओर ले जाता है।          

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